आज का समय स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से बदलते दृष्टिकोण का समय है। एक ओर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान नई-नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों के साथ निरंतर विकसित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दुनिया भर में स्वास्थ्य को केवल रोगों के उपचार तक सीमित न मानकर जीवनशैली, मानसिक संतुलन, पोषण, योग, प्रकृति और चेतना के व्यापक संदर्भ में भी समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा तथा समग्र स्वास्थ्य (Holistic Health) जैसे विषयों के प्रति राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रुचि बढ़ी है।
इन्हीं विषयों के अध्ययन, अनुसंधान तथा स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े व्यक्तित्वों में डॉ. अम्बर पारे का नाम उल्लेखनीय रूप से सामने आता है। मध्यप्रदेश के हरदा जिले के ग्राम दुलिया से संबंधित डॉ. अम्बर पारे भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा, स्वास्थ्य शिक्षा, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग-विज्ञान तथा चेतना-विज्ञान के अध्ययन एवं जनजागरण से जुड़े हुए हैं। उनका मानना है कि स्वास्थ्य केवल रोगों के उपचार का विषय नहीं है, बल्कि व्यक्ति के शरीर, मन, प्राण, जीवनशैली, आहार, पर्यावरण, व्यवहार और आत्मिक संतुलन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
डॉ. अम्बर पारे के अनुसार भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में स्वास्थ्य को एक समग्र अवधारणा के रूप में देखा गया है। आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा तथा भारतीय दार्शनिक परंपराएँ व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन पर समान रूप से बल देती हैं। आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न अनेक समस्याओं के बीच इन विषयों का अध्ययन स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ प्रस्तुत करता है।
अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान डॉ. अम्बर पारे ने आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान तथा प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान दोनों का अध्ययन किया। उन्होंने बीडीएस एवं बीएनवाईएस के साथ-साथ पीजीडीएचएचएम, पीजीडीसीएफटी, मास्टर इन अल्टरनेटिव मेडिसिन, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इन्फेक्शियस डिजीज तथा सर्टिफिकेट इन डायबिटीज मेलिटस सहित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्ण किए। उनके अनुसार आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और भारतीय स्वास्थ्य परंपराएँ परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि अध्ययन के दो ऐसे आयाम हैं जिनसे स्वास्थ्य को अधिक व्यापक रूप में समझा जा सकता है।
महायोगी स्वर्गीय गुरुदेव श्री जमुना प्रसाद चतुर्वेदी जी के सान्निध्य में योग, ध्यान, प्राण-विज्ञान, साधना और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध पक्षों का अध्ययन उनके स्वास्थ्य चिंतन का महत्वपूर्ण आधार बना। महाअवतार श्री बाबा जी की गुरु-परंपरा से प्रेरित अध्ययन ने भी उनके विचारों को प्रभावित किया। इसी अध्ययन के आधार पर भारतीय ज्ञान परंपरा, योग-विज्ञान, चेतना-विज्ञान और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के समन्वित अध्ययन से संबंधित इंडियन एंशिएंट साइंटिफिक स्पिरिचुअल हेल्थ सिस्टम की अवधारणा पर उनका कार्य केंद्रित रहा है।
डॉ. अम्बर पारे का अध्ययन केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं है। वे स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से लोगों में ऐसी जीवनशैली विकसित करने पर बल देते हैं जिसमें संतुलित आहार, योगाभ्यास, प्राणायाम, मानसिक अनुशासन, प्राकृतिक जीवनशैली, नियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दृष्टिकोण शामिल हो। उनके अनुसार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की रोकथाम में जनजागरण और स्वास्थ्य शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उनके अध्ययन के प्रमुख क्षेत्रों में आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग चिकित्सा, हठयोग, प्राण चिकित्सा, मर्म चिकित्सा, ध्यान चिकित्सा, मंत्र चिकित्सा, प्राण-विज्ञान, स्वर-विज्ञान, पंचमहाभूत आधारित स्वास्थ्य सिद्धांत, आहार चिकित्सा, जल चिकित्सा, मृदा चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, योग निद्रा, चक्र शोधन, कुण्डलिनी शक्ति जागरण, सबकॉन्शियस माइंड अध्ययन, सुपरकॉन्शियस माइंड अध्ययन तथा चेतना-विज्ञान के विविध आयाम शामिल हैं। इन विषयों को वे स्वास्थ्य शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में अध्ययन एवं जनजागरण का माध्यम मानते हैं।
ग्राम दुलिया, जिला हरदा स्थित डॉ. अम्बर पारे नेचुरोपैथी सेंटर भी इसी विचारधारा के साथ कार्य कर रहा है। यह केंद्र स्वास्थ्य परामर्श के अतिरिक्त स्वास्थ्य शिक्षा, जीवनशैली प्रबंधन, योग-विज्ञान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित समग्र स्वास्थ्य जागरूकता से संबंधित गतिविधियों का भी माध्यम है। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, कतर एवं अन्य देशों से भी लोग स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन के लिए इस केंद्र से जुड़े हैं।
डॉ. अम्बर पारे विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों, वैज्ञानिक सम्मेलनों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, विशेषज्ञ व्याख्यानों तथा स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में सहभागिता करते रहे हैं। उनके अध्ययन एवं कार्यों को विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर मान्यता भी प्राप्त हुई है। वर्ष 2019 में उन्हें फेलो ऑफ द रॉयल सोसाइटी ऑफ मेडिसिन (एफआरएसएम) की फैलोशिप प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स रिकग्निशन, जी-20 सिविल 20 सेवा समिट सम्मान, हेल्थ केयर अवार्ड तथा हेल्थ एक्सीलेंस अवार्ड सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। जी-20 सिविल 20 सेवा समिट सम्मान तत्कालीन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तथा हेल्थ केयर अवार्ड मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रदान किया गया।
सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत डॉ. अम्बर पारे गरीब, दिव्यांग एवं मजदूर वर्ग के लोगों से परामर्श शुल्क नहीं लेते हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य शिक्षा एवं जनजागरण से जुड़े सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता निरंतर बनी हुई है।
आज जब विश्व स्वास्थ्य विमर्श में समग्र स्वास्थ्य, जीवनशैली आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर नए सिरे से चर्चा हो रही है, तब भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन, अनुसंधान और जनजागरण की दिशा में डॉ. अम्बर पारे का कार्य इस संवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा सकता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच सार्थक समन्वय स्थापित करने की दिशा में उनके प्रयास निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।